क्या भारत असमानता से पूर्णतः मुक्त है?

क्या भारत असमानता से पूर्णतः मुक्त है? इस प्रश्न के दो उत्तर हैं। यदि संवैधानिक तौर पर देखे तो भारत मे असमानता नही है, क्योंकि संविधान से सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्राप्त है।         परंतु, यदि वास्तविकता पर नजर डालें तो भारत मे अत्यधिक असमानता देखने को मिलती है। चाहे वह शिक्षा क्षेत्र में हो या सवास्थ्य में, सभी जगह असमानता देखी जा सकती है। सम्पन्न वर्गीय लोगों को आधुनिक शिक्षा सुविधाएं प्राप्त हैं तो वहीं गरीब छात्र परंपरागत तौर पर चल रहे सरकारी विद्यालयों में पढ़ने को विवश हैं। विडंबना तो देखिए, सरकारी नौकरियां पाने के लिए दोनों को साथ मे प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।        यदि स्वास्थ्य की बात करें तो वहां भी वही हाल है। भारतीय स्वास्थ्य सुविधाओं को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है। सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य सुविधाएं। सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल वही कुछ वैसी ही है जैसी सरकारी शिक्षा प्रणाली की है। किसी अस्पताल में दवाओं की कमी है तो कहीं डॉक्टरों की। यहां भी गरीब लोग विवश हैं क्योंकि निजी स्वास्थ्य उनके पहुंच से बाहर है। दूसरी ओर निजी अस्पताल सुविधाओं से परिपूर्ण हैं परंतु उनके खर्चे व्यय करने की क्षमता केवल सम्पन्न वर्गों में ही है। मतदान के पंक्तियों में भले ही सभी वर्ग के लोग एक साथ खड़े होते हों परंतु जब अन्य सुविधाओं की बात आती है तो असमानता की एक दरार गरीबों को सम्पन्न लोगों से अलग कर देती है, और यही भारत की वास्तविकता है। क्या हमें एक ऐसी व्यवस्था नही बनानी चाहिए जिसमें सभी वर्गो को समान शिक्षा और स्वास्थ्य सुभिधाएँ प्रदान की जा सके? श्याम कुमार ✒

Comments